Transliteration: (Wa laqad naadaanaa Noohun falani'mal mujeeboon)
"और यक़ीनन नूह ने हमें पुकारा था [73], तो हम क्या ही अच्छे दुआ क़बूल फ़रमाने वाले हैं [74]!"
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने साढ़े नौ सौ साल तक क़ौम को तब्लीग़ फ़रमाई। जब काफ़िरों की सरकशी हद से गुज़र गई, तो आपने अल्लाह की बारगाह में अर्ज़ की: "रब्बी इन्नी मग़लूबुन फ़न्तसिर" (ऐ रब! मैं बे-बस हूँ, तू मेरी मदद फ़रमा)।
अल्लाह तआला ने अपने नबी की दुआ को ऐसी शान से क़बूल फ़रमाया कि मोमिनों को कश्ती में नजात अता की और ज़मीन के तमाम सरकश काफ़िरों को तूफ़ान में ग़र्क़ कर दिया।
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