Transliteration: (Wa ja'alnaa zurriyyatahoo hummul baaqeen)
"और हमने उनकी ही नस्ल को बाक़ी रहने वाला बनाया [77];"
तूफ़ान के बाद जितने लोग कश्ती में थे, उनमें से सिर्फ़ हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के तीन बेटों — साम, हाम और याफ़िस — की नस्ल से दुनिया में इंसानियत दोबारा फैली। इसीलिए हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को "आदम-ए-सानी" (दूसरा आदम) कहा जाता है।
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