कुरान - 37:77 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
وَجَعَلۡنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلۡبَاقِينَ

Transliteration: (Wa ja'alnaa zurriyyatahoo hummul baaqeen)

और हमने उनकी ही नस्ल को (दुनिया में) बाक़ी रहने वाला बनाया [77]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 77

"और हमने उनकी ही नस्ल को बाक़ी रहने वाला बनाया [77];"

[77] हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) — आदम-ए-सानी

तूफ़ान के बाद जितने लोग कश्ती में थे, उनमें से सिर्फ़ हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के तीन बेटों — साम, हाम और याफ़िस — की नस्ल से दुनिया में इंसानियत दोबारा फैली। इसीलिए हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को "आदम-ए-सानी" (दूसरा आदम) कहा जाता है।

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