मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 89 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 89
"और फ़रमाया: 'बेशक मैं बीमार होने वाला हूँ [89]';"
[89] "इन्नी सक़ीम" — तौरीया और दिली रंज
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह फ़रमाना कि "इन्नी सक़ीम" (मैं बीमार हूँ), बिल्कुल सच था:
क़ौम के शिर्क और कुफ़्र को देखकर आपका दिल शदीद रंजीदा और बीमार था,
या यह कि इंसान फ़ितरी तौर पर बीमारी के अंदेशे में रहता है। यह कलाम शरई ऐतबार से तौरीया था (जिसमें बात हक़ीक़त पर मबनी होती है मगर सुनने वाला दूसरा मफ़हूम समझता है)। यह झूठ से पाक है।
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