कुरान - 37:95 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

95
قَالَ أَتَعۡبُدُونَ مَا تَنۡحِتُونَ

Transliteration: (Qaala ata'budoona maa tanhitoon)

उन्होंने फ़रमाया: "क्या तुम उनकी पूजा करते हो जिन्हें तुम ख़ुद तराशते हो [95]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 95 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 95

"उन्होंने फ़रमाया: 'क्या तुम उनकी पूजा करते हो जिन्हें तुम ख़ुद तराशते हो [95]?'"

[95] तराशे हुए पत्थरों की पूजा का बुतलान

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने निहायत मंतक़ी और बे-बाक दलील दी: "जो बुत मेरी मार से ख़ुद को न बचा सके, वे तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से क्या बचाएंगे?" इंसान अपने हाथों से पत्थर को तराश कर मूरत बनाए और फिर उसी के आगे हाथ बांध कर खड़ा हो जाए, इससे बड़ी जहालत क्या हो सकती है!

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