कुरान - 37:97 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

97
قَالُواْ ٱبۡنُواْ لَهُۥ بُنۡيَٰنٗا فَأَلۡقُوهُ فِي ٱلۡجَحِيمِ

Transliteration: (Qaalub noo lahoo bun yaanan fa alqoohu fil jaheem)

वे बोले: "उसके लिए एक ऊँचा चबूतरा (इमारत) बनाओ [97], फिर उसे दहकती हुई आग में झोंक दो!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 97 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 97

"वे बोले: 'उसके लिए एक ऊँचा चबूतरा बनाओ [97], फिर उसे दहकती आग में झोंक दो!'"

[97] नमरूदियों की साज़िश और ज़िंदा जलाने की मुमानअत

दलील में हारने के बाद ज़ालिमों ने ज़ुल्म का सहारा लिया। उन्होंने तीस गज़ लम्बी और बीस गज़ चौड़ी एक अज़ीम चारदीवारी बनाई और कई दिनों तक लकड़ियां जमा करके भयानक अलाव जलाया। फिर हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को मिंजनीक़ के ज़रिए उस आग में फेंक दिया। हदीस शरीफ़ में आग से ज़िंदा जलाने की सख़्त मुमानअत फ़रमाई गई है क्योंकि यह काफ़िरों का तरीक़ा है।

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