कुरान - 91:5 सूरह अश-शम्स अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا

Transliteration: (Wassamaaa'i wa maa banaahaa )

5.आकाश की क़सम [5] और जिसने उसे बनाया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शम्स आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

5. आकाश का महत्व (The Significance of the Sky)

आकाश: अल्लाह की दिव्य शक्ति का प्रतीक (The Sky as a Symbol of Divine Power):

  • आकाश पृथ्वी को घेरे हुए है और यह जीवन के लिए आवश्यक सभी आशीर्वादों का स्रोत है, जैसे वर्षा और सूरज की रोशनी। ये आशीर्वाद अल्लाह की दिव्य शक्ति और दया का प्रतीक हैं। इसलिए आकाश पर क़समा खाया गया है ताकि इसकी दिव्य प्रावधान और पोषण से जुड़ी महत्ता को उजागर किया जा सके।

आकाश का आध्यात्मिक प्रतीकवाद (Spiritual Symbolism of the Sky):

  • गहरे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आकाश को पैगंबर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) की नबूवत के रूप में देखा जा सकता है। जैसे आकाश सभी जीवन के लिए प्रावधान करता है, वैसे ही अल्लाह की आशीर्वाद और कृपा पैगंबर के माध्यम से पूरी सृष्टि तक पहुंचती है। सृष्टि के हर हिस्से को हमेशा पैगंबर की मार्गदर्शन, दया और आशीर्वाद की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, आकाश, इस संदर्भ में, पैगंबर के दिव्य आशीर्वाद को मानवता तक पहुंचाने की व्यापकता का प्रतीक है।

पैगंबर पर निरंतर निर्भरता (The Continuous Dependence on the Prophet):

  • जैसे पृथ्वी जीवन-संवर्धन तत्वों के लिए आकाश पर निर्भर है, वैसे ही पूरी सृष्टि पैगंबर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) पर आध्यात्मिक पोषण के लिए निर्भर है। उनकी मार्गदर्शन और आशीर्वाद, जो अल्लाह द्वारा प्रदान किए गए हैं, पूरी सृष्टि की भलाई के लिए आवश्यक हैं, समय की शुरुआत से लेकर अनन्तता तक।

तफसीर अज़ीज़ी की व्याख्या (Tafseer Azizi's Interpretation):

  • तफसीर अज़ीज़ी की व्याख्या के अनुसार, आकाश पैगंबर (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) की नबूवत का प्रतीक है, जो उनके माध्यम से दिव्य दया और आशीर्वाद के निरंतर प्रवाह को दर्शाता है।

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