कुरान - 91:1 सूरह अश-शम्स अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
وَٱلشَّمۡسِ وَضُحَىٰهَا

Transliteration: (Wash shamsi wa duhaa haa )

1. (मैं क़सम खाता हूँ) सूरज और उसकी चमक [1] की। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शम्स आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

1. सूरह में कसम और उनके गहरे मायने (Oaths in the Surah and Their Deeper Meanings)

सूरज और उसकी रौशनी की कसम (The Oath of the Sun and Its Light):
सूरज दुनिया के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यह खेती-बाड़ी, जानवरों और पेड़-पौधों पर गहरा असर डालता है।
पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और सूरज की समानता (Symbolism for the Holy Prophet [صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ]):

  • पैग़ंबर को सूरज के साथ तुलना किया गया है, क्योंकि उनकी रहमतें और हिदायतें पूरी दुनिया को रौशन करती हैं।
  • जैसे सूरज दिन में सीधा और रात में चाँद और सितारों के जरिए परोक्ष रूप से फ़ायदा पहुंचाता है, वैसे ही पैग़ंबर की बरकतें उनके आने से पहले दूसरे नबियों के जरिए और उनके पर्दा करने के बाद उलमा और औलिया के जरिए लोगों को मिलीं।

चाँद और सितारे (The Moon and the Stars):

  • बिजली, जेनरेटर जैसी कृत्रिम रौशनी कभी भी सूरज की जगह नहीं ले सकती, जो रात के अंधेरे को मिटा सके। इसी तरह पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दिलों से कुफ़्र का अंधेरा मिटाते हैं।
  • काफ़िर, चाहे कितने भी अच्छे काम करें, पैग़ंबर की हिदायत के बिना ईमान हासिल नहीं कर सकते।

दूरी से पाक करना (Purification from a Distance):

  • सूरज दूर से ही गंदी ज़मीन को साफ़ कर देता है, उसी तरह पैग़ंबर अपने रूहानी असर से दिलों को पाक करते हैं।

बर्फ़ और ग़फ़लत को पिघलाना (Melting Ice and Negligence):

  • सूरज बर्फ़ और ओस को पिघला देता है, ठीक उसी तरह पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बरकतें गुनाह और ग़फ़लत को दिलों से मिटा देती हैं। उन्होंने काबा को बुतों से पाक किया, वैसे ही दिलों को पाक करते हैं।

हिफाज़त और जागरूकता (Protection and Awareness):

  • दिन के उजाले में सूरज इंसान को नुकसान और लुटेरों से महफूज़ रखता है। उसी तरह पैग़ंबर का नूर दिल में होने से इंसान ग़फ़लत और शैतान के डर से बच जाता है।

सूरज की ज़रूरत (Universal Need for the Sun):

  • राजा से लेकर आम आदमी तक, सबको सूरज की ज़रूरत है। इसी तरह, हर इंसान—नबी, औलिया, नेक और गुनहगार—को पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ज़रूरत है।

रौशनी और बरकत का ज़रिया (Source of Light and Blessings):

  • सितारे अपनी रौशनी सूरज से लेते हैं और सूरज अपनी रौशनी अल्लाह से। इसी तरह, हर बरकत पैग़ंबर के जरिए मिलती है, जो अल्लाह से आती है।

अलग-अलग प्रतिबिंब (Diversity of Reflections):

  • सूरज की एक रौशनी अलग-अलग रंगों में सितारों के जरिए नज़र आती है। इसी तरह पैग़ंबर की रूहानी रौशनी अलग-अलग तरीक़ों में क़ादिरी, चिश्ती, सुहरवर्दी और नक़्शबंदी जैसे तरीक़ों में झलकती है।

पैग़ंबर की रौशनी के दो पहलू (Dual Aspects of the Prophet’s Illumination):

  1. ज़ाहिरी रौशनी (Outer Refulgence - Shariah): यह इंसान के अमल और जिस्म को दुरुस्त और पाक करती है।
  2. बातिनी रौशनी (Inner Refulgence - Tareeqat): यह दिलों को महफूज़ और रौशन करती है, जिससे रूहानी खैर व बरकत होती है।

यह पूरा बयान सूरज और पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बीच की गहरी समानताओं को दर्शाता है, जो इंसानियत को हिदायत और दिलों को पाक करने में उनकी अहमियत को उजागर करता है।

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