कुरान - 91:2 सूरह अश-शम्स अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
وَٱلۡقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا

Transliteration: (Wal qamari izaa talaa haa )

2.और चाँद की क़सम, जब वह सूरज के पीछे आता है [2]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शम्स आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

2. सूरज और चाँद का प्रतीकात्मक अर्थ (The Symbolism of the Sun and the Moon)

प्राकृतिक घटनाओं में सूरज और चाँद (The Sun and Moon in Natural Phenomena):

  • चाँद सूरज के डूबने पर निकलता है, खासकर पूनम की रात या महीने के शुरुआत में हلال (क्रेसेंट) के दौरान।
  • यह चक्र, जिसमें उदय और अस्त होता है, व्यक्तियों और क़ौमों के उभरने और गिरने का प्रतीक है।

पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का सूरज से प्रतीक (The Sun Representing the Holy Prophet [صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ]):

  • पैग़ंबर को सूरज के साथ जोड़ा गया है, जो अद्वितीय रौशनी और हिदायत देते हैं।
  • चाँद हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) का प्रतीक है, जो नबियों के बाद सबसे अफ़ज़ल शख़्स हैं, जैसे सूरज के बाद चाँद।

हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) की अफ़ज़लियत (Hazrat Abu Bakr Siddiq's [رضي الله عنه] Excellence):

  • वह पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सीधे वारिस हैं, बिना किसी दूरी के।
  • उनका पैग़ंबर के पास दफ़न होना उनकी अफ़ज़लियत और उनके ख़िलाफ़त की पुष्टि करता है।

चाँद औलिया और उलमा का प्रतीक (The Moon Representing Saints and Scholars):

  • चाँद उन नेक औलिया और उलमा का प्रतीक है, जो पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की रौशनी को प्रतिबिंबित करते हैं और क़यामत तक लोगों को राह दिखाते हैं।

इंसानी रूह और दिल (The Human Soul and Heart):

  • सूरज इंसानी रूह का प्रतीक है, जबकि चाँद दिल का जो रूह की रौशनी को प्रतिबिंबित करता है।
  • जब दिल रूह की रौशनी से रौशन होता है और नफ़्स-ए-अम्मारा (बुरा नफ़्स) और शैतान के असर से बचा रहता है, तो यह ईमान, रूहानी इल्म और नेकी को बढ़ावा देता है।

दिल के दोहरी प्रभाव (The Heart's Dual Influence):

  • दिल को ज़मीन के साथ तुलना की गई है, जो कभी रूह की पाकीज़गी से संचालित होता है और कभी नफ़्स के बहकावे में चला जाता है।
  • इन दोनों प्रभावों का संतुलन रूहानी उन्नति या गिरावट का निर्धारण करता है।

यह व्याख्या प्राकृतिक घटनाओं और रूहानी प्रतीकों को जोड़ते हुए अल्लाह की हिदायत, इंसानी गुणों और रूहानी हस्तियों की भूमिका को पैग़ंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की रौशनी को प्रतिबिंबित करने में दर्शाती है।

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