Transliteration: (Wa laa yakhaafu'uqbaahaa)
"अल्लाह तआला पर कोई डर नहीं कि वह उनके खिलाफ बदला ले" वाक्य यह दर्शाता है कि अल्लाह के पास सभी कार्यों पर पूर्ण नियंत्रण है, और उन्हें बदला लेने का कोई डर नहीं है। अल्लाह तआला सर्वोच्च अधिकार रखते हैं, और वह कभी भी किसी बाहरी शक्ति से बाधित या रुकते नहीं हैं।
वैकल्पिक रूप से, इस बयान को इस तरह भी समझा जा सकता है कि हज़रत सालेह (अलैहि सलाम) को किसी भी प्रतिशोध का डर नहीं था क्योंकि उनके खिलाफ खड़े सभी अविश्वासियों और उनके संदेश को नकारने वालों का पहले ही विनाश हो चुका था। ईश्वर का प्रतिशोध लागू हो चुका था, और जो सत्य को नकार चुके थे, उनका भाग्य तय हो चुका था।
यह हमें पैग़म्बरों की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है। अल्लाह के पैग़म्बर सृजन की शक्ति से मुक्त होते हैं, क्योंकि उन्हें अल्लाह की हिदायत और अधिकार से पूरी सुरक्षा प्राप्त होती है। डर उनके लिए नहीं होता, बल्कि यह सृजन है जो उनके मार्गदर्शन पर निर्भर रहता है। यह उस आत्मविश्वास और साहस को दर्शाता है जो पैग़म्बर रखते हैं, यह जानते हुए कि उनका मिशन दिव्य रूप से समर्थित है और उन्हें किसी भी संसारिक शक्ति के क्रोध का डर नहीं होता।
पैग़म्बर की निडरता (Fearlessness of the Prophet)
पैग़म्बर दिव्य सुरक्षा में होते हैं और अल्लाह की सृष्टि से उन्हें कोई डर नहीं होता। उनका एकमात्र उद्देश्य संदेश को सच्चाई से देना होता है।
ईश्वर का प्रतिशोध (Divine Retribution)
अल्लाह का न्याय अटल होता है, और जब अविश्वासी सत्य का विरोध करते हैं, तो वह उन पर बदला लेने की शक्ति रखते हैं। हालांकि, यह सृजन है जो अल्लाह के सामने उत्तरदायी है, न कि पैग़म्बर।
पैग़म्बरों की अल्लाह पर निर्भरता (Prophets' Dependence on Allah)
जबकि सृजन पैग़म्बर के मार्गदर्शन पर निर्भर करता है, पैग़म्बर डर से मुक्त होते हैं और अपने मिशन में सफलता के लिए केवल अल्लाह पर ही निर्भर होते हैं।
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