कुरान - 91:7 सूरह अश-शम्स अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَنَفۡسٖ وَمَا سَوَّىٰهَا

Transliteration: (Wa nafsinw wa maa sawwaahaa)

7.और जान की क़सम, और जिसने उसे पूरा किया [7]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शम्स आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

7. आत्मा का महत्व (The Significance of the Soul)

आत्मा: उत्कृष्टता का प्रतीक (The Soul as a Symbol of Excellence):

  • यहां 'आत्मा' से तात्पर्य है, या तो حضرت آدم (अलैहि सलाम) की आत्मा से, या फिर सम्पूर्ण मानवता की आत्मा से। इंसान, जो सारी मخلूकात में सबसे श्रेष्ठ है, अपनी महत्वपूर्ण स्थिति रखता है। इसलिए, आत्मा पर क़स्म खायी गई है, ताकि इसकी आध्यात्मिक महत्ता को उजागर किया जा सके।

आत्मा के विभिन्न अर्थ (The Soul's Multiple Meanings):

  • अरबी में 'आत्मा' के कई अर्थ होते हैं, जैसे व्यक्ति, दिल, जीवन, खून, और साँस। इस संदर्भ में, 'आत्मा' एक इंसान के अलग-अलग पहलुओं का प्रतीक हो सकती है—यह दिल, जीवन, या सम्पूर्ण व्यक्तित्व का संकेत दे सकती है। चूँकि इंसान को सभी मخلूकात में सबसे उत्तम माना गया है, इसलिए आत्मा पर क़स्म खाकर इसकी आध्यात्मिकता को प्रमुख किया गया है।

आत्मा में उत्कृष्टता की क्षमता (The Soul's Potential for Excellence):

  • इंसान की आत्मा, शुरूआत में, गुणों से खाली हो सकती है, लेकिन उसमें कई गुणों को अपनाने की क्षमता होती है। आत्मा परिवर्तन और वृद्धि की क्षमता रखती है, और यह उत्कृष्टता का प्रतीक बन सकती है। यह यह दिखाता है कि आत्मा में शुद्धता और दिव्य गुणों को प्राप्त करने की क्षमता है, जो मार्गदर्शन और प्रयास से हासिल की जा सकती है।

इंसान का दिल एक सफ़ेद पन्ने जैसा है (The Human Heart as a Blank Slate):

  • इंसान का दिल एक खाली पन्ने की तरह होता है, जो अपने अनुभवों, इरादों और प्रभावों से छाप पाने के लिए तैयार रहता है। जैसे एक "क़लमकार" का प्रभाव दिल पर पड़ेगा, वह उस पर अपनी छाप छोड़कर उसकी प्रकृति और चरित्र को आकार देगा। इस प्रकार, दिल का महत्व बहुत बड़ा है, क्योंकि यह आत्मा की स्थिति और दिव्य मार्गदर्शन से इसके संबंध को दर्शाता है।

निचली आत्मा और जागरूक आत्मा का क़दम (The Role of the Baser Self and the Conscious Self):

  • आत्मा इंसान की विभिन्न अवस्थाओं का प्रतीक है: निचली आत्मा (जो दुनियावी इच्छाओं की ओर प्रवृत्त होती है), जागरूक आत्मा (जो समझ और ज्ञान प्राप्ति की तलाश करती है), और संतुष्ट आत्मा (जो अल्लाह की رضا में शांति पाती है)। आत्मा पर क़स्म खायी गई है, ताकि इन सभी पहलुओं को प्रमुख किया जा सके, और आत्मा की पूर्णता की दिशा में यात्रा के महत्व को दर्शाया जा सके।

आत्मा और पूर्णता के बीच संबंध (The Connection Between Soul and Perfection):

  • अंततः, जो भी अर्थ आत्मा को दिए जाएं, वे 'पूर्णता' के विचार से जुड़े होते हैं। 'पूर्ण' आत्मा वह है, जिसने आध्यात्मिक विकास और परिशोधन की प्रक्रिया पूरी की हो। इसलिए आत्मा के विभिन्न आयाम दिव्य गुणों और आध्यात्मिक संतोष की क्षमता को दर्शाते हैं।

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