कुरान - 26:105 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
كَذَّبَتۡ قَوۡمُ نُوحٍ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

Transliteration: (Kazzabat qawmu Noohinil Mursaleen)

नूह की क़ौम ने रसूलों को झुठलाया [108]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 105

"नूह की क़ौम ने रसूलों को झुठलाया [108];"

[108] एक रसूल का इंकार तमाम रसूलों का इंकार है

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम की तरफ़ सिर्फ़ हज़रत नूह ही मबऊस हुए थे, लेकिन क़ुरआन मजीद ने जमा के सीग़े (रसूलों) के साथ फ़रमाया कि उन्होंने सब रसूलों को झुठलाया। इसकी वजह यह है कि तमाम अंबियाए किराम की दावत की बुनियाद तौहीद और अल्लाह की फ़रमांबरदारी है; लिहाज़ा किसी एक नबी का इंकार करना दरअस्ल अल्लाह के तमाम नबियों और रसूलों का इंकार करना है।

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