कुरान - 26:103 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayatanw wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 103

"बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे;"

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के इस वाक़िए और मुशरिकों के अंजाम में अक़्लमन्दों के लिए बड़ी इबरत व नसीहत है, लेकिन मक्के के मुशरिक और दुनिया के अक्सर हक़-फ़रामोश लोग नसीहत हासिल करने और ईमान लाने से महरूम रहे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now