Transliteration: (Wa laa sadeeqin hameem)
"और न ही कोई सच्चा और हमदर्द दोस्त [105]!"
हज़रत हसन बसरी रहमतुल्लाहि अलैह फ़रमाते हैं: 'नेक लोगों की सोहबत इख़्तियार करो और सालेह दोस्त बनाओ, क्योंकि क़ियामत के दिन सच्चे मोमिन दोस्त एक-दूसरे के काम आएंगे।' लेकिन काफ़िरों और नाफ़रमानों के दुनियावी मतलबी दोस्त वहां उनसे बेज़ार हो जाएंगे और कोई हमदर्द यार उनके ग़म में शरीक न होगा।
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