कुरान - 26:101 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٖ

Transliteration: (Wa laa sadeeqin hameem)

और न ही कोई सच्चा और हमदर्द दोस्त [105]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 101

"और न ही कोई सच्चा और हमदर्द दोस्त [105]!"

[105] दुनियावी झूठी दोस्ती का ख़ात्मा

हज़रत हसन बसरी रहमतुल्लाहि अलैह फ़रमाते हैं: 'नेक लोगों की सोहबत इख़्तियार करो और सालेह दोस्त बनाओ, क्योंकि क़ियामत के दिन सच्चे मोमिन दोस्त एक-दूसरे के काम आएंगे।' लेकिन काफ़िरों और नाफ़रमानों के दुनियावी मतलबी दोस्त वहां उनसे बेज़ार हो जाएंगे और कोई हमदर्द यार उनके ग़म में शरीक न होगा।

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