कुरान - 26:100 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

100
فَمَا لَنَا مِن شَٰفِعِينَ

Transliteration: (Famaa lanaa min shaa fi'een)

पस अब न तो हमारा कोई सिफ़ारिशी है [104], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 100 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 100

"पस अब न तो हमारा कोई सिफ़ारिशी है [104],"

[104] मुशरिकों के हक़ में शफ़ाअत का न होना

क़ियामत के दिन मोमिनीन और सालेहीन के लिए तो अंबियाए किराम, औलियाए इज़ाम और फ़रिश्ते अल्लाह के इज़्न से शफ़ाअत (सिफ़ारिश) फ़रमाएंगे और उन्हें जहन्नम से निकाल कर जन्नत में पहुंचाएंगे। लेकिन कुफ़्र व शिर्क पर मरने वालों के लिए कोई शफ़ीअ (सिफ़ारिश करने वाला) न होगा जो उन्हें अल्लाह के ग़ज़ब से बचा सके। वे यह देख कर हसरत से चीख़ उठेंगे।

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