Transliteration: (Famaa lanaa min shaa fi'een)
"पस अब न तो हमारा कोई सिफ़ारिशी है [104],"
क़ियामत के दिन मोमिनीन और सालेहीन के लिए तो अंबियाए किराम, औलियाए इज़ाम और फ़रिश्ते अल्लाह के इज़्न से शफ़ाअत (सिफ़ारिश) फ़रमाएंगे और उन्हें जहन्नम से निकाल कर जन्नत में पहुंचाएंगे। लेकिन कुफ़्र व शिर्क पर मरने वालों के लिए कोई शफ़ीअ (सिफ़ारिश करने वाला) न होगा जो उन्हें अल्लाह के ग़ज़ब से बचा सके। वे यह देख कर हसरत से चीख़ उठेंगे।
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