Transliteration: (Falaw anna lanaa karratan fanakoona minal mu'mineen)
"तो काश कि हमारे लिए एक बार फिर लौटना मुमकिन होता [106], ताकि हम सच्चे मोमिन बन जाते [107]!'"
जब दोज़ख़ी देखेंगे कि न कोई मददगार है और न सिफ़ारिशी, तो वे इंतहाई मायूसी और हसरत से तमन्ना करेंगे कि काश हमें सिर्फ़ एक बार दुनिया में वापस भेज दिया जाए ताकि हम अपनी पिछली ग़लतियों की तलाफ़ी कर सकें। लेकिन यह तमन्ना महज़ ख़्वाबो-ख़याल है, दुनिया इम्तिहान की जगह थी जो ख़त्म हो चुकी।
वे कहेंगे कि अगर हमें दोबारा मोहलत मिले तो हम ज़रूर अल्लाह और उसके रसूलों पर सच्चा ईमान लाकर फ़रमांबरदार बन जाएंगे। मगर वक़्त गुज़र जाने के बाद का ईमान कोई फ़ायदा नहीं देता। नजात का दारोमदार गै़ब पर ईमान लाने में था, अज़ाब देखकर तो फ़िरऔन ने भी ईमान का दावा किया था मगर वह मुस्तरद कर दिया गया।
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