कुरान - 26:114 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

114
وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa maaa ana bitaaridil mu'mineen)

और मैं ईमान वालों को (अपनी मजलिस से) धक्के देकर निकालने वाला नहीं हूँ [116]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 114 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 114

"और मैं ईमान वालों को धक्के देकर निकालने वाला नहीं हूँ [116];"

[116] ग़रीब मोमिनों की हिफ़ाज़त और ताज़ीम

काफ़िर सरदारों की यह शर्त थी कि अगर तुम इन ग़रीब और मुफ़्लिस मोमिनों को अपनी महफ़िल से निकाल दो तो हम तुम्हारे पास आ सकते हैं। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने साफ़ इंकार फ़रमाया कि जो अल्लाह और रसूल पर ईमान ला चुके हैं, वे अल्लाह के महबूब हैं। मैं अपने रब के सच्चे बन्दों को कभी अपने से दूर नहीं कर सकता।

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