कुरान - 26:117 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوۡمِي كَذَّبُونِ

Transliteration: (Qaala Rabbi inna qawmee kazzaboon)

(नूह ने) अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! बेशक मेरी क़ौम ने मुझे झुठला दिया है [118]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 117

"(नूह ने) अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! बेशक मेरी क़ौम ने मुझे झुठला दिया है [118];"

[118] साढ़े नौ सौ साल की सब्र-आज़मा तबलीग़ के बाद बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने साढ़े नौ सौ (950) साल तक अपनी क़ौम को दिन-रात अल्लाह की तौहीद की दावत दी, हर तरह से समझाया और उनकी सख़्तियां व तकलीफ़ें झेलीं। जब क़ौम की सरकशी हद से बढ़ गई और उनके ईमान लाने की कोई उम्मीद बाक़ी न रही, तो आपने अपने परवरदिगार की बारगाह में अपनी बेबसी और क़ौम की तकज़ीब का हाल अर्ज़ किया।

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