Transliteration: (Qaala Rabbi inna qawmee kazzaboon)
"(नूह ने) अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! बेशक मेरी क़ौम ने मुझे झुठला दिया है [118];"
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने साढ़े नौ सौ (950) साल तक अपनी क़ौम को दिन-रात अल्लाह की तौहीद की दावत दी, हर तरह से समझाया और उनकी सख़्तियां व तकलीफ़ें झेलीं। जब क़ौम की सरकशी हद से बढ़ गई और उनके ईमान लाने की कोई उम्मीद बाक़ी न रही, तो आपने अपने परवरदिगार की बारगाह में अपनी बेबसी और क़ौम की तकज़ीब का हाल अर्ज़ किया।
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