कुरान - 26:118 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

118
فَٱفۡتَحۡ بَيۡنِي وَبَيۡنَهُمۡ فَتۡحٗا وَنَجِّنِي وَمَن مَّعِيَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Faftab bainee wa bai nahum fat hanw wa najjinee wa mam ma'iya minal mu'mineen)

पस तू मेरे और उनके दरमियान खुला (आर-पार का) फ़ैसला फ़रमा दे, और मुझे और जो मोमिन मेरे साथ हैं उन सबको नजात अता फ़रमा [119]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 118 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 118

"पस तू मेरे और उनके दरमियान खुला फ़ैसला फ़रमा दे, और मुझे और मेरे साथी मोमिनों को नजात अता फ़रमा [119]!'"

[119] हक़ व बातिल के दरमियान फ़ैसले और नजात की दुआ

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने दुआ की कि ऐ बारी तआला! अब हक़ और बातिल का आर-पार का फ़ैसला फ़रमा दे यानी मुजरिमों पर अपना अज़ाब नाज़िल फ़रमा कर उन्हें नेस्त व नाबूद कर दे, और अपनी रहमत से मुझे और मेरे साथ चंद मुट्ठी भर अहले-ईमान को इस ज़ुल्म व फ़साद से सलामती व नजात अता फ़रमा।

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