कुरान - 26:139 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

139
فَكَذَّبُوهُ فَأَهۡلَكۡنَٰهُمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Fakazzaboohu fa ahlaknaahum; inna fee zaalika la aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

पस उन्होंने उन्हें झुठला दिया, चुनांचे हमने उन्हें तबाह व बर्बाद कर डाला [139]; बेशक इसमें बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [140]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 139 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 139

"पस उन्होंने उन्हें झुठला दिया, चुनांचे हमने उन्हें तबाह कर डाला [139]; बेशक इसमें बड़ी निशानी है, मगर अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [140];"

[139] आठ दिन और सात रातों की तूफ़ानी आंधी में तबाही

अल्लाह तआला ने उन पर ऐसी शदीद ठंडी और तूफ़ानी हवा (सरी-सर) मुसल्लत फ़रमाई जो मुसलसल सात रातें और आठ दिन चलती रही। हवा आदमियों और मवेशियों को आसमान तक उठाती और ज़मीन पर इस तरह पटकती कि उनके सर अलग हो जाते और वे खजूर के खोखले तनों की तरह ज़मीन पर ढेर हो गए।

[140] बाक़ी इंसानों के लिए इबरतनाक सबक़

इतनी ताक़तवर क़ौम का इस तरह नामो-निशान मिट जाना अल्लाह की अज़ीम निशानी है, मगर फिर भी अक्सर लोग अपनी ग़फ़लत के पर्दे हटाकर ईमान नहीं लाते।

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