Transliteration: (Fakazzaboohu fa ahlaknaahum; inna fee zaalika la aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)
"पस उन्होंने उन्हें झुठला दिया, चुनांचे हमने उन्हें तबाह कर डाला [139]; बेशक इसमें बड़ी निशानी है, मगर अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [140];"
अल्लाह तआला ने उन पर ऐसी शदीद ठंडी और तूफ़ानी हवा (सरी-सर) मुसल्लत फ़रमाई जो मुसलसल सात रातें और आठ दिन चलती रही। हवा आदमियों और मवेशियों को आसमान तक उठाती और ज़मीन पर इस तरह पटकती कि उनके सर अलग हो जाते और वे खजूर के खोखले तनों की तरह ज़मीन पर ढेर हो गए।
इतनी ताक़तवर क़ौम का इस तरह नामो-निशान मिट जाना अल्लाह की अज़ीम निशानी है, मगर फिर भी अक्सर लोग अपनी ग़फ़लत के पर्दे हटाकर ईमान नहीं लाते।
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