कुरान - 26:145 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

145
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maaa as'alukum 'alaihi min ajrin in ajriya illaa 'alaa Rabbil 'aalameen)

और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [145]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 145 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 145

"और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता; मेरा अजर तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [145];"

[145] बे-ग़रज़ दावत और रूहानी खुलूस

हज़रत सालेह ने साफ़ कर दिया कि मुझे तुमसे माल, दौलत या सरदारी का कोई लालच नहीं। मेरी दावत महज़ अल्लाह की रज़ा के लिए है और मेरा अज्र सिर्फ़ रब्बुल आलमीन के फ़ज़ल पर मौक़ूफ़ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now