Transliteration: (Atutrakoona fee maa haahunnaaa aamineen)
"क्या तुम उन चीज़ों में जो यहाँ हैं हमेशा अमन व चैन से रहने दिए जाओगे [146]?"
हज़रत सालेह ने अपनी क़ौम को झिंझोड़ते हुए फ़रमाया कि क्या तुमने यह समझ रखा है कि तुम इन बाग़ों, महलों और ऐश की नेमतों में हमेशा अमन व अमान से ज़िन्दा रहोगे और तुम्हें कोई मौत या अज़ाब नहीं आएगा? यह ग़फ़लत और धोका है।
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