कुरान - 26:164 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

164
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maaa as'alukum 'alaihi min ajrin in ajriya illaa 'alaa Rabbil 'aalameen)

और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता [163]; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [164]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 164 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 164

"और मैं इस पर तुमसे कोई उजरत नहीं मांगता [163]; मेरा अजर तो बस तमाम जहानों के रब के ज़िम्मे है [164];"

[163] बे-लौस दावत-ए-हक़

हज़रत लूत ने साफ़ फ़रमा दिया कि मैं अपनी इस ख़ैरख़्वाही और नसीहत के बदले तुमसे कोई दुनियावी फ़ायदा या माल तलब नहीं करता।

[164] रब्बुल आलमीन से सवाब का यक़ीन

मेरा अज्र व सवाब सिर्फ़ तमाम कायनात के रब के ज़िम्मे है जो ख़ुलूस और नेकी की पूरी क़द्र फ़रमाने वाला है।

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