Transliteration: (Ataatoonaz zukraana minal 'aalameen)
"क्या तुम तमाम जहान वालों में से मर्दों के पास जाते हो [165]?"
क़ौम-ए-लूत ने तारीख़-ए-इंसानियत में पहली बार 'अमरद-परस्ती' और हमजिंस-परस्ती (लवात़त) की वह घिनौनी और नापाक रस्म ईजाद की थी जो जानवरों में भी नहीं पाई जाती। हज़रत लूत अलैहिस्सलाम ने उनके इस ग़ैर-फ़ितरी और शर्मनाक जुर्म पर सख़्त मलामत फ़रमाई।
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