कुरान - 26:166 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

166
وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمۡ رَبُّكُم مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُمۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ عَادُونَ

Transliteration: (Wa tazaroona maa khalaqa lakum Rabbukum min azwaajikum; bal antum qawmun 'aadoon)

और उन बीवियों को छोड़ देते हो [165] जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा फ़रमाया है? बल्कि तुम हद से बढ़ जाने वाले लोग हो [166]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 166 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 166

"और उन बीवियों को छोड़ देते हो जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा किया? बल्कि तुम हद से बढ़ जाने वाले लोग हो [166]!'"

[165] पाकीज़ा निकाह की नेमत को ठुकराना

अल्लाह तआला ने नस्ले-इंसानी की बक़ा और पाक-दामनी के लिए मर्दों के वास्ते औरतें पैदा फ़रमाईं और निकाह का पाक निज़ाम अता किया। मगर क़ौम-ए-लूत ने इस पाकीज़ा नेमत को छोड़ कर नापाकी की राह चुनी।

[166] 'क़ौमुन आदून' (हद से तजावुज़ करने वाले)

वे फ़ितरत के क़वानीन, हया और इंसानी शराफ़त की तमाम हदों को फांद चुके थे। जो कौ़म हया और पाकीज़गी का दामन छोड़ देती है, वह अल्लाह के अज़ाब का शिकार होकर रहती है।

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