कुरान - 26:173 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

173
وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ

Transliteration: (Wa amtarnaa 'alaihim mataran fasaaa'a matarul munzareen)

और हमने उन पर एक (हौलनाक पत्थरों की) बारिश बरसाई [171]; पस बहुत ही बुरी बारिश थी उन लोगों पर जिन्हें पहले से डराया जा चुका था [172]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 173 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 173

"और हमने उन पर पत्थरों की बारिश बरसाई [171]; पस बहुत ही बुरी बारिश थी उन पर जिन्हें डराया जा चुका था [172]!"

[171] खंगरों और पकी हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश

बस्तियों को उलटने के साथ-साथ उन पर आसमान से कंकरियों और पकी हुई मिट्टी के पत्थरों (सिज्जील) की बारिश बरसाई गई। हर पत्थर पर उस मुजरिम का नाम लिखा हुआ था जिसके सर पर वह गिरता था।

[172] मुनज़रीन (डराए हुओं) की बदतरीन सज़ा

जिन्हें बार-बार नबियों ने अल्लाह के अज़ाब से डराया था मगर वे बाज़ न आए, उनके लिए यह पत्थरों की बारिश इन्तिहाई रुसवाकुन और बदतरीन बारिश साबित हुई।

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