कुरान - 26:174 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

174
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [174]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 174 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 174

"बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [174];"

[174] बहर-ए-मुर्दार (Dead Sea) में अज़ीम इबरत

क़ौम-ए-लूत की तबाह-शुदा बस्तियों की जगह आज 'बहर-ए-मुर्दार' (डेड सी) वाक़े है जिसका पानी बदबूदार और ज़हरीला है। यह मंज़र दुनिया के लिए खुली निशानी है, मगर नाफ़रमान दिल इससे भी नसीहत नहीं लेते।

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