Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)
"बेशक इसमें बहुत बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [174];"
क़ौम-ए-लूत की तबाह-शुदा बस्तियों की जगह आज 'बहर-ए-मुर्दार' (डेड सी) वाक़े है जिसका पानी बदबूदार और ज़हरीला है। यह मंज़र दुनिया के लिए खुली निशानी है, मगर नाफ़रमान दिल इससे भी नसीहत नहीं लेते।
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