कुरान - 26:52 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
۞وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنۡ أَسۡرِ بِعِبَادِيٓ إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ

Transliteration: (Wa awhainaaa ilaa Moosaaa an asri bi'ibaadeee innakum muttaba'oon)

और हमने मूसा की तरफ़ वह्य भेजी कि, 'मेरे बंदों को लेकर रात ही रात में निकल पड़ो; बेशक तुम्हारा पीछा किया जाएगा [59]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 52

"और हमने मूसा की तरफ़ वह्य भेजी कि, 'मेरे बंदों को लेकर रात में निकलो; बेशक पीछा किया जाएगा [59]।"

[59] मिस्र से रात की हिजरत का हुक्म

सालों के मोजिज़ात और मुतालबात के बाद जब फ़िरऔन की सरकशी हद से बढ़ गई, तो अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा को हुक्म दिया कि बनी इसराईल के तमाम मर्दों, औरतों और बच्चों को लेकर रात की तारीकी में मिस्र से कूच कर जाओ। और फ़रमाया कि फ़िरऔन सुबह होते ही अपने लश्कर के साथ तुम्हारा पीछा करेगा।

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