कुरान - 26:50 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
قَالُواْ لَا ضَيۡرَۖ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ

Transliteration: (Qaaloo la daira innaaa ilaa Rabbinaa munqalliboon)

उन्होंने कहा, 'कोई परवाह नहीं! बेशक हम अपने रब ही की तरफ़ लौटने वाले हैं [57]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 50

"उन्होंने कहा, 'कोई परवाह नहीं! बेशक हम अपने रब की तरफ़ लौटने वाले हैं [57];"

[57] ईमान की कु़व्वत और शहादत का शौक़

ईमान का नूर दिल में आते ही जादूगरों के दिलों से मौत और सूली का सारा ख़ौफ़ ख़त्म हो गया। उन्होंने फ़िरऔन की आँखों में आँखें डालकर कहा: 'ला ज़ैरा'—हमें तेरी इन धमकियों की कोई परवाह नहीं! तू ज़्यादा से ज़्यादा हमारी दुनिया की फ़ानी ज़िंदगी ख़त्म कर सकता है, और हम तो अपने रब के हुज़ूर शहादत का रुत्बा पाकर लौटने वाले हैं।

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