कुरान - 26:51 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
إِنَّا نَطۡمَعُ أَن يَغۡفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَٰيَٰنَآ أَن كُنَّآ أَوَّلَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Innaa natma'u ai yaghfira lanaa Rabbunaa khataa yaanaaa an kunnaaa awwalal mu'mineen (section 3))

बेशक हम उम्मीद रखते हैं कि हमारा रब हमारे गुनाहों को बख़्श देगा क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले बने हैं [58]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 51

"बेशक हम उम्मीद रखते हैं कि हमारा रब गुनाह बख़्श देगा क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाए [58]।"

[58] साबिक़ीन-ए-अव्वलीन की फ़ज़ीलत

उन्होंने बारगाह-ए-इलाही में दुआ की कि ऐ अल्लाह! हमारे पिछले तमाम कुफ़्र और जादूगरी के गुनाहों को मुआफ़ फ़रमा दे, क्योंकि इस अज़ीम इज़्तिमा में हक़ ज़ाहिर होने पर हम सबसे पहले तेरे नबी पर ईमान लाने वाले बने हैं। सुबह को वे काफ़िर जादूगर थे और शाम को बा-ख़ुदा शहीद और वली बन गए!

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