कुरान - 26:65 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
وَأَنجَيۡنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Wa anjainaa Moosaa wa mam ma'ahooo ajma'een)

और हमने मूसा को और उन तमाम लोगों को जो उनके साथ थे सही-सलामत नजात दे दी [73]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 65

"और हमने मूसा को और उनके साथ वालों को सही-सलामत नजात दे दी [73];"

[73] अहले-ईमान की मुकम्मल सलामती और नजात

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और बनी इसराईल का आख़िरी आदमी भी सही-सलामत समंदर के दूसरे किनारे (सहरा-ए-सीना) पर पहुंच गया। किसी का एक बाल भी बेजा न हुआ और अल्लाह का वादा सच साबित हुआ।

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