Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayaah; wa maa kaana aksaru hu mu'mineen)
"बेशक इसमें बड़ी निशानी है [75], मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले न थे [76]।"
इस पूरे वाक़िए में कायनात के तमाम इंसानों के लिए अज़ीम निशानी है कि अल्लाह अपने वलियों की कैसे ग़ैब से मदद फ़रमाता है और ज़ालिमों का कैसा ख़ौफ़नाक अंजाम करता है।
इतनी बड़ी तारीखी हक़ीक़त जानने के बावजूद अक्सर लोग ईमान नहीं लाते और पिछली क़ौमों के अंजाम से कोई सबक़ हासिल नहीं करते।
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