कुरान - 26:63 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
فَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡبَحۡرَۖ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرۡقٖ كَٱلطَّوۡدِ ٱلۡعَظِيمِ

Transliteration: (Fa awhainaaa ilaa Moosaaa anidrib bi'asaakal bahra fanfalaqa fakaana kullu firqin kattawdil 'azeem)

तो हमने मूसा की तरफ़ वह्य भेजी कि, 'अपने असा (लाठी) से समंदर पर मारो;' पस वह (समंदर) फ़ौरन फट गया [70], और उसका हर टुकड़ा एक बहुत बड़े अज़ीम पहाड़ की तरह हो गया [71]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 63

"तो हमने मूसा की तरफ़ वह्य भेजी कि 'असा समंदर पर मारो;' पस वह फट गया [70], और हर टुकड़ा अज़ीम पहाड़ जैसा हो गया [71]!"

[70] समंदर का शक़ होना और बारह सूखे रास्ते बनना

अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि अपनी लाठी समंदर के पानी पर मारो। हज़रत मूसा ने जैसे ही असा मारा, समंदर फ़ौरन बारह रास्तों में फट गया और ज़मीन बिल्कुल सूखी और हमवार हो गई ताकि बनी इसराईल के बारह क़बीले अलग-अलग रास्तों से गुज़र सकें।

[71] पानी की दीवारें अज़ीम पहाड़ों की मानिंद

समंदर का बहता हुआ पानी दोनों तरफ़ जम गया और बर्फ़ या पत्थर की तरह खड़े होकर बहुत बड़े अज़ीम पहाड़ों (तौर-ए-अज़ीम) की शक्ल इख़्तियार कर गया। पानी में जालीदार झरोखे बन गए ताकि हर क़बीला दूसरे क़बीले को देखकर मुतमइन रहे। यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान मोजिज़ा था।

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