कुरान - 40:70 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِٱلۡكِتَٰبِ وَبِمَآ أَرۡسَلۡنَا بِهِۦ رُسُلَنَاۖ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Allazeena kazzaboo bil Kitaabi wa bimaa arsalnaa bihee Rusulanaa fasawfa ya'lamoon)

जिन्होंने किताब को झुठलाया और उन बातों को जिनके साथ हमने अपने रसूलों को भेजा था [183]; तो वे अनक़रीब जान लेंगे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 70

"जिन्होंने किताब को झुठलाया और उन बातों को जिनके साथ हमने अपने रसूलों को भेजा था [183]; तो वे अनक़रीब जान लेंगे;"

[183] तमाम किताबों और रसूलों पर ईमान फ़र्ज़

क़ुरआन और पिछले तमाम आसमानी सहीफ़ों और रसूलों की लाई हुई शरीअत व मोजिज़ात को मानना फ़र्ज़ है। किसी एक का भी इनकार कुफ़्र है। मुनकिरीन बहुत जल्द अपने इस इनकार का भयानक अंजाम देख लेंगे।

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