कुरान - 40:68 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
هُوَ ٱلَّذِي يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ فَإِذَا قَضَىٰٓ أَمۡرٗا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

Transliteration: (Huwal lazee yuhyee wa yumeetu fa izaa qadaaa amran fa innamaa yaqoolu lahoo kun fa yakoon (section 7))

वही है जो ज़िंदा करता है और मारता है; फिर जब वह किसी काम का फ़ैसला फ़रमाता है, तो उससे सिर्फ़ यही फ़रमाता है: 'हो जा' तो वह हो जाता है [180] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 68

"वही है जो ज़िंदा करता है और मारता है; फिर जब वह किसी काम का फ़ैसला फ़रमाता है, तो उससे सिर्फ़ यही फ़रमाता है: 'हो जा' तो वह हो जाता है [180] ।"

[180] आलम-ए-अम्र—'कुन फयकून'

ज़िंदगी और मौत का मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। वह किसी औज़ार या सबब का मोहताज नहीं। जब किसी चीज़ की तख़लीक़ या क़ियामत का इरादा फ़रमाता है, तो सिर्फ़ 'कुन' फ़रमाता है और वह फ़ौरन वुजूद में आ जाती है।

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