कुरान - 40:66 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
۞قُلۡ إِنِّي نُهِيتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَمَّا جَآءَنِيَ ٱلۡبَيِّنَٰتُ مِن رَّبِّي وَأُمِرۡتُ أَنۡ أُسۡلِمَ لِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Qul innee nuheetu an a'budal lazeena tad'oona min doonil laahi lammaa jaaa'a niyal baiyinaatu mir Rabbee wa umirtu an uslima li Rabbil 'aalameen)

आप फ़रमाइए: 'मुझे मना फ़रमाया गया है [168] कि मैं उनकी इबादत करूँ जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो [169], जब कि मेरे पास मेरे रब की तरफ़ से रोशन दलाइल आ चुके हैं [170], और मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं सारे जहानों के रब के हुज़ूर अपनी गर्दन झुका दूँ [171] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 66

"आप फ़रमाइए: 'मुझे मना फ़रमाया गया है [168] कि मैं उनकी इबादत करूँ जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो [169], जब कि मेरे पास मेरे रब की तरफ़ से रोशन दलाइल आ चुके हैं [170], और मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं सारे जहानों के रब के हुज़ूर अपनी गर्दन झुका दूँ [171] ।'"

[168] हुज़ूर ﷺ की अज़ली तौहीद व इस्मत

हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ऐलान-ए-नबुव्वत से पहले भी कभी किसी बुत की पूजा नहीं फ़रमाई। आप बचपन ही से शिर्क से पूरी तरह मासूम और महफ़ूज़ थे।

[169] बातिल माबूदों से क़तई बेज़ारी

अल्लाह के सिवा किसी की इबादत करना मुतलक़न हराम और शिर्क है।

[170] रोशन दलाइल व वह्य

अल्लाह की तरफ़ से अता करदा रोशन दलाइल, बसाइर और मोजिज़ात ने हक़ को दिन की तरह रौशन कर दिया।

[171] मुकम्मल तस्लीम व रिज़ा

रब्बुल आलमीन के हुज़ूर सर-ब-सुजूद होना और उसकी मुकम्मल इताअत करना ही बंदगी का मेआ'र है।

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