कुरान - 40:65 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
هُوَ ٱلۡحَيُّ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱدۡعُوهُ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَۗ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Huwal Hayyu laaa ilaaha illaa Huwa fad'oohu mukh liseena lahud-deen; alhamdu lillaahi Rabbil 'aalameen)

वही हमेशा ज़िंदा रहने वाला है [166], उसके सिवा कोई माबूद नहीं, तो तुम ख़ालिस उसी के बंदे होकर उसकी इबादत करो [167]; सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहानों का रब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 65

"वही हमेशा ज़िंदा रहने वाला है [166], उसके सिवा कोई माबूद नहीं, तो तुम ख़ालिस उसी के बंदे होकर उसकी इबादत करो [167]; सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहानों का रब है।"

[166] अल-हय्युल-क़य्यूम

अल्लाह ही हक़ीक़ी तौर पर हमेशा ज़िंदा रहने वाला है जिसे कभी मौत या फ़ना नहीं। बाक़ी सबकी हयात अल्लाह ही के अता फ़रमाने से है।

[167] इख़्लास के साथ इबादत

दीन और इबादत को शिर्क, रियाकारी और दुनियावी लालच से पाक करके सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए ख़ालिस करना ही मक़बूलियत की शर्त है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now