Transliteration: (Falam yaku yanfa 'uhum eemaanuhum lammaa ra-aw ba'sana sunnatal laahil latee qad khalat fee 'ibaadihee wa khasira hunaalikal kaafiroon (section 9))
"लेकिन उनका ईमान उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› नफ़ा न दे सका जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हमारा अज़ाब देख लिया था [214]; यह अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का दसà¥à¤¤à¥‚र है जो उसके बंदों में जारी रहा है [215], और वहाठकाफ़िर ख़सारे (नà¥à¤•़सान) में पड़ गà¤à¥¤"
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला का यह मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•़िल क़ानून है कि इमà¥à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¨ का वक़à¥à¤¤ ख़तà¥à¤® होने और अज़ाब या मौत के फ़रिशà¥à¤¤à¥‡ को देख लेने के बाद किसी का ईमान या तौबा क़बूल नहीं होती। हज़रत यूनà¥à¤¸ अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® की क़ौम ने अज़ाब की निशानियां देखकर अज़ाब आने से पहले तौबा कर ली थी इसलिठउनकी तौबा क़बूल हà¥à¤ˆà¥¤
अज़ाब के आते ही काफ़िरों की तमाम उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¥‡à¤‚ ख़तà¥à¤® हो गईं और वे दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ और आख़िरत दोनों में हमेशा के लिठहलाक व ख़सारा नसीब हो गà¤à¥¤
अलहमà¥à¤¦à¥ लिलà¥à¤²à¤¾à¤¹! सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) का तरà¥à¤œà¥à¤®à¤¾ व तफ़सीर मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² हà¥à¤†à¥¤
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