कुरान - 40:80 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَلَكُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ وَلِتَبۡلُغُواْ عَلَيۡهَا حَاجَةٗ فِي صُدُورِكُمۡ وَعَلَيۡهَا وَعَلَى ٱلۡفُلۡكِ تُحۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa lakum feehaa manaafi'u wa litablughoo 'alaihaa haajatan fee sudoorikum wa 'alaihaa wa 'alal fulki tuhmaloon)

और तुम्हारे लिए उनमें और भी बहुत से फ़ायदे हैं [201], और ताकि तुम उनके ज़रिये अपने सीनों की हाजतें (मक़ासिद) पूरी कर सको [202], और उन पर और कश्तियों पर तुम सवार किए जाते हो [203] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 80 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 80

"और तुम्हारे लिए उनमें और भी बहुत से फ़ायदे हैं [201], और ताकि तुम उनके ज़रिये अपने सीनों की हाजतें (मक़ासिद) पूरी कर सको [202], और उन पर और कश्तियों पर तुम सवार किए जाते हो [203] ।"

[201] मवेशियों के मुतअद्दिद मनाफ़ेअ

सवारी और गोश्त के अलावा दूध, मक्खन, घी, ऊन, खालें और उनसे बनने वाले लिबास व ख़ैमे सब अल्लाह की अज़ीम नेमतें हैं।

[202] तिजारत और मक़ासिद का हुसूल

इनके ज़रिये दूर-दराज़ मुल्कों में सामान-ए-तिजारत ले जाकर मुनाफ़ा और हाजात पूरी की जाती हैं।

[203] ख़ुश्की और तरी की सवारियाँ

ख़ुश्की में जानवरों (ऊंटों) पर और समंदर में कश्तियों व जहाज़ों पर अल्लाह के करम से सफ़र तय होता है। भारी भरकम कश्तियों का पानी पर तैरना अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीम मोजिज़ा है।

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