Transliteration: (Wa laqad arsalnaa Rusulam min qablika minhum man qasasnaa 'alaika wa minhum mal lam naqsus 'alaik; wa maa kaana li Rasoolin any yaatiya bi Aayatin illaa bi iznil laah; fa izaa jaaa'a amrul laahi qudiya bilhaqqi wa khasira hunaalikal mubtiloon (section 8))
"और बेशक हमने आपसे पहले बहà¥à¤¤ से रसूल à¤à¥‡à¤œà¥‡; उनमें से बा'ज़ वे हैं जिनका अहवाल हमने आपसे बयान फ़रमाया [196], और बा'ज़ वे हैं जिनका अहवाल हमने आपसे (क़à¥à¤°à¤†à¤¨ में) बयान नहीं फ़रमाया [197]; और किसी रसूल का यह काम नहीं कि अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के हà¥à¤•à¥à¤® के बग़ैर कोई निशानी (मोजिज़ा) ले आठ[198]; फिर जब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का हà¥à¤•à¥à¤® आà¤à¤—ा तो हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाà¤à¤—ा, और उस वक़à¥à¤¤ अहले बातिल बड़े ख़सारे (नà¥à¤•़सान) में रहेंगे [199] ।"
क़à¥à¤°à¤†à¤¨-à¤-पाक में पचà¥à¤šà¥€à¤¸ (25) से ज़ायद जलीलà¥à¤² क़दà¥à¤° अंबिया के मà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤• असà¥à¤®à¤¾ और तफ़सीलात बयान फ़रमाई गई हैं।
तमाम अंबिया की तादाद à¤à¤• लाख चौबीस हज़ार या कम-ओ-बेश बयान की गई है। क़à¥à¤°à¤†à¤¨ में सबका नाम नहीं आया मगर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ने अपने हबीब ï·º को तमाम अंबिया और उनकी उमà¥à¤®à¤¤à¥‹à¤‚ के अहवाल से बाख़बर फ़रमाया, जैसा कि शबे मेराज में तमाम अंबिया ने हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º की इक़à¥à¤¤à¤¿à¤¦à¤¾ में नमाज़ पढ़ी।
रसूल अपनी मरà¥à¤œà¤¼à¥€ से नहीं बलà¥à¤•ि अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के इज़à¥à¤¨ व हà¥à¤•à¥à¤® से मोजिज़ात ज़ाहिर फ़रमाते हैं। काफ़िरों की मनमानी फ़रमाइशों पर मोजिज़ात नहीं दिखाठजाते।
जब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का फ़ैसला आ जाता है तो बातिल परसà¥à¤¤ बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ हो जाते हैं।
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