कुरान - 40:78 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

78
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسُلٗا مِّن قَبۡلِكَ مِنۡهُم مَّن قَصَصۡنَا عَلَيۡكَ وَمِنۡهُم مَّن لَّمۡ نَقۡصُصۡ عَلَيۡكَۗ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأۡتِيَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ فَإِذَا جَآءَ أَمۡرُ ٱللَّهِ قُضِيَ بِٱلۡحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ

Transliteration: (Wa laqad arsalnaa Rusulam min qablika minhum man qasasnaa 'alaika wa minhum mal lam naqsus 'alaik; wa maa kaana li Rasoolin any yaatiya bi Aayatin illaa bi iznil laah; fa izaa jaaa'a amrul laahi qudiya bilhaqqi wa khasira hunaalikal mubtiloon (section 8))

और बेशक हमने आपसे पहले बहुत से रसूल भेजे; उनमें से बा'ज़ वे हैं जिनका अहवाल हमने आपसे बयान फ़रमाया [196], और बा'ज़ वे हैं जिनका अहवाल हमने आपसे (क़ुरआन में) बयान नहीं फ़रमाया [197]; और किसी रसूल का यह काम नहीं कि अल्लाह के हुक्म के बग़ैर कोई निशानी (मोजिज़ा) ले आए [198]; फिर जब अल्लाह का हुक्म आएगा तो हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उस वक़्त अहले बातिल बड़े ख़सारे (नुक़सान) में रहेंगे [199] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 78 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 78

"और बेशक हमने आपसे पहले बहुत से रसूल भेजे; उनमें से बा'ज़ वे हैं जिनका अहवाल हमने आपसे बयान फ़रमाया [196], और बा'ज़ वे हैं जिनका अहवाल हमने आपसे (क़ुरआन में) बयान नहीं फ़रमाया [197]; और किसी रसूल का यह काम नहीं कि अल्लाह के हुक्म के बग़ैर कोई निशानी (मोजिज़ा) ले आए [198]; फिर जब अल्लाह का हुक्म आएगा तो हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उस वक़्त अहले बातिल बड़े ख़सारे (नुक़सान) में रहेंगे [199] ।"

[196] क़ुरआन में मज़कूर अंबिया-ए-किराम

क़ुरआन-ए-पाक में पच्चीस (25) से ज़ायद जलीलुल क़द्र अंबिया के मुबारक अस्मा और तफ़सीलात बयान फ़रमाई गई हैं।

[197] ग़ैर मज़कूर अंबिया और हुज़ूर ﷺ का इल्म-ए-ग़ैब

तमाम अंबिया की तादाद एक लाख चौबीस हज़ार या कम-ओ-बेश बयान की गई है। क़ुरआन में सबका नाम नहीं आया मगर अल्लाह ने अपने हबीब ﷺ को तमाम अंबिया और उनकी उम्मतों के अहवाल से बाख़बर फ़रमाया, जैसा कि शबे मेराज में तमाम अंबिया ने हुज़ूर ﷺ की इक़्तिदा में नमाज़ पढ़ी।

[198] मोजिज़ात इज़्न-ए-इलाही के ताबे

रसूल अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि अल्लाह के इज़्न व हुक्म से मोजिज़ात ज़ाहिर फ़रमाते हैं। काफ़िरों की मनमानी फ़रमाइशों पर मोजिज़ात नहीं दिखाए जाते।

[199] अज़ाब के वक़्त बातिल का नुक़सान

जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाता है तो बातिल परस्त बर्बाद हो जाते हैं।

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