कुरान - 40:77 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
فَٱصۡبِرۡ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞۚ فَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعۡضَ ٱلَّذِي نَعِدُهُمۡ أَوۡ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيۡنَا يُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Fasbir inna wa'dal laahi haqq; fa immaa nuriyannak ba'dal lazee na'i duhum aw natawaffayannaka fa ilainaa yurja'oon)

तो आप सब्र फ़रमाइए [194], बेशक अल्लाह का वा'दा सच्चा है; फिर चाहे हम आपको उसका कुछ हिस्सा दिखा दें जिसका हम उनसे वा'दा करते हैं या आपको पहले ही वफ़ात दे दें [195], बहरहाल उन्हें हमारी ही तरफ़ पलट कर आना है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 77

"तो आप सब्र फ़रमाइए [194], बेशक अल्लाह का वा'दा सच्चा है; फिर चाहे हम आपको उसका कुछ हिस्सा दिखा दें जिसका हम उनसे वा'दा करते हैं या आपको पहले ही वफ़ात दे दें [195], बहरहाल उन्हें हमारी ही तरफ़ पलट कर आना है।"

[194] सब्र-ए-जमील की हिदायत

हुज़ूर ﷺ को तसल्ली दी गई कि आप उनकी नाफ़रमानियों पर सब्र फ़रमाएं, अल्लाह का वा'दा-ए-अज़ाब ज़रूर पूरा होगा।

[195] दुनिया और आख़िरत में बदला

कुछ अज़ाब हुज़ूर ﷺ की हयात-ए-ज़ाहिरी में बद्र और फ़तह-ए-मक्का में ज़ाहिर हुआ, और कुछ सहाबा-ए-किराम के दौर में, और मुकम्मल अज़ाब आख़िरत में होगा जब सब अल्लाह की बारगाह में पेश होंगे।

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