कुरान - 40:75 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمۡ تَفۡرَحُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَبِمَا كُنتُمۡ تَمۡرَحُونَ

Transliteration: (Zaalikum bimaa kuntum tafrahoona fil ardi bighairil haqqi wa bimaa kuntum tamrahoon)

यह (अज़ाब) इसलिए है कि तुम ज़मीन में नाहक़ इतराते थे [190] और इसलिए कि तुम तकब्बुर करते थे [191] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 75

"यह (अज़ाब) इसलिए है कि तुम ज़मीन में नाहक़ इतराते थे [190] और इसलिए कि तुम तकब्बुर करते थे [191] ।"

[190] बातिल और गुनाह पर इतराना

काफ़िर दुनिया में अपने शिर्क, गुनाहों और दौलत पर घमंड करते थे और मोमिनीन का मज़ाक़ उड़ाते थे। बातिल पर इतराना कुफ़्र है, जबकि अल्लाह के फ़ज़्ल व रहमत (हुज़ूर ﷺ की विलादत व अता) पर ख़ुशी मनाना इबादत है जैसा कि सूरह यूनुस (आयत 58) में हुक्म हुआ।

[191] तकब्बुर की सज़ा

हक़ के मुक़ाबले में सरकशी और घमंड दिखाना ही इस दर्दनाक अज़ाब का अस्ल सबब बना।

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