कुरान - 40:74 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
مِن دُونِ ٱللَّهِۖ قَالُواْ ضَلُّواْ عَنَّا بَل لَّمۡ نَكُن نَّدۡعُواْ مِن قَبۡلُ شَيۡـٔٗاۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Min doonil laahi qaaloo dalloo 'annaa bal lam nakun nad'oo min qablu shai'aa; kazaalika yudillul laahul kaafireen)

'अल्लाह के सिवा?' वे कहेंगे: 'वे तो हमसे गुम हो गए [187], बल्कि हम तो पहले किसी चीज़ की इबादत ही नहीं करते थे [188]'; इसी तरह अल्लाह काफ़िरों को भटका देता है [189] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 74

"'अल्लाह के सिवा?' वे कहेंगे: 'वे तो हमसे गुम हो गए [187], बल्कि हम तो पहले किसी चीज़ की इबादत ही नहीं करते थे [188]'; इसी तरह अल्लाह काफ़िरों को भटका देता है [189] ।"

[187] बातिल माबूदों की बेबसी व गुमशुदगी

काफ़िर रोकर कहेंगे कि वे बुत सब हमसे ग़ायब हो गए, हमारी कोई मदद न कर सके।

[188] बुतपरस्ती की हक़ीक़त का एतिराफ़ या इनकार

या तो वे अज़ाब से बचने के लिए झूठा इनकार करेंगे कि हमने कभी उनकी पूजा नहीं की, या फिर उनकी मुराद यह होगी कि उनकी कोई हक़ीक़त ही न थी, वे महज़ बेजान पत्थर और बातिल ख़्याल थे।

[189] मुनकिरों की हैरत व भटकाव

अल्लाह तआला काफ़िरों को उनकी सरकशी के सबब ऐसी हैरत व हवास-बाख़्तगी में मुब्तला फ़रमा देता है।

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