कुरान - 40:76 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
ٱدۡخُلُوٓاْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ فَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلۡمُتَكَبِّرِينَ

Transliteration: (Udkhulooo abwaaba Jahannama khaalideena feehaa fabi'sa maswal mutakabbireen)

जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा उसमें रहने के लिए [192]; तो क्या ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों का [193] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 76

"जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा उसमें रहने के लिए [192]; तो क्या ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों का [193] ।"

[192] दर्जात-ए-जहन्नम के दरवाज़े

हर क़िस्म के मुजरिम और काफ़िर के लिए जहन्नम का ख़ास दरवाज़ा और तबक़ा मुक़र्रर है जिसमें वे हमेशा-हमेशा के लिए दाख़िल किए जाएंगे।

[193] तकब्बुर करने वालों का हलाकत-खेज़ अंजाम

जिन्होंने अंबिया, औलिया और अहले हक़ के मुक़ाबले में अपनी झूठी बड़ाई का घमंड किया, उनका ठिकाना यही ज़िल्लत की आग है।

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