कुरान - 40:82 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَانُوٓاْ أَكۡثَرَ مِنۡهُمۡ وَأَشَدَّ قُوَّةٗ وَءَاثَارٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Afalam yaseeroo fil ardi fa yanzuroo kaifa kaana 'aaqibatul lazeena min qablihim; kaanoo aksara minhum wa ashadda quwwatanw wa aasaaran fil ardi famaaa aghnaa 'anhum maa kaanoo yaksiboon)

क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की [206] ताकि देखते कि उनसे पहले वालों का अंजाम कैसा हुआ [207]? वे तादाद में इनसे ज़्यादा थे और ताक़त में इनसे कहीं बढ़कर थे [208]; तो जो कुछ वे कमाते थे उनके कुछ काम न आया [209] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 82

"क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की [206] ताकि देखते कि उनसे पहले वालों का अंजाम कैसा हुआ [207]? वे तादाद में इनसे ज़्यादा थे और ताक़त में इनसे कहीं बढ़कर थे [208]; तो जो कुछ वे कमाते थे उनके कुछ काम न आया [209] ।"

[206] इबरत के लिए ज़मीन में सफ़र

हलाकशुदा क़ौमों के खंडरात देखकर इबरत हासिल करना, और औलिया-ए-किराम के मज़ारात पर बरकत व रहमत के हुसूल के लिए हाज़िरी देना दोनों शरीअत में मुस्तहसन अमल हैं।

[207] तारीख़ी असबाक़

पिछली क़ौमों का अंजाम देखकर अपने दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करना चाहिए।

[208] ताक़त और कसरत की नाकामी

पिछली क़ौमें तादाद, दौलत और इमारतों में आज के मुनकिरों से कहीं बढ़कर थीं मगर अज़ाब को न टाल सकीं।

[209] माल व दौलत की बे-सूदी

जब अल्लाह का अज़ाब आया तो उनकी तमाम दौलत, लश्कर और हुनर उनके किसी काम न आए।

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