कुरान - 40:84 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
فَلَمَّا رَأَوۡاْ بَأۡسَنَا قَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَحۡدَهُۥ وَكَفَرۡنَا بِمَا كُنَّا بِهِۦ مُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Falammaa ra aw baasanaa qaalooo aamannaa billaahi wahdahoo wa kafarnaa bimaa kunnaa bihee mushrikeen)

फिर जब उन्होंने हमारा अज़ाब देखा तो कहने लगे: 'हम अकेले अल्लाह पर ईमान लाए [213], और हमने उन सबका इनकार किया जिन्हें हम उसका शरीक ठहराते थे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 84

"फिर जब उन्होंने हमारा अज़ाब देखा तो कहने लगे: 'हम अकेले अल्लाह पर ईमान लाए [213], और हमने उन सबका इनकार किया जिन्हें हम उसका शरीक ठहराते थे।'"

[213] अज़ाब देखकर ईमान लाना ना-क़ाबिल-ए-क़बूल

जब अज़ाब आँखों के सामने आ गया तो उन्होंने तौहीद का इक़रार किया और बुतों से बेज़ारी ज़ाहिर की, मगर यह ईमान 'ईमान बिल-ग़ैब' नहीं था बल्कि अज़ाब के ख़ौफ़ से था। ऐन अज़ाब या नज़ा के वक़्त का ईमान अल्लाह के यहाँ मक़बूल नहीं होता।

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