कुरान - 14:18 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
مَّثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ أَعۡمَٰلُهُمۡ كَرَمَادٍ ٱشۡتَدَّتۡ بِهِ ٱلرِّيحُ فِي يَوۡمٍ عَاصِفٖۖ لَّا يَقۡدِرُونَ مِمَّا كَسَبُواْ عَلَىٰ شَيۡءٖۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَٰلُ ٱلۡبَعِيدُ

Transliteration: (Masalul lazeena kafaroo bi Rabbihim; a'maaluhum karamaadinish taddat bihir reehu fee yawmin 'aasifin; laa yaqdiroona mimmaa kasaboo 'alaa shai'; zaalika huwad dalaalul ba'eed)

जिन लोगों ने अपने रब के साथ कुफ़्र किया उनकी मिसाल यह है कि उनके कर्म उस राख की तरह हैं जिस पर एक तूफ़ानी दिन में तेज़ हवा चल पड़ी हो; जो कुछ उन्होंने कमाया था उसमें से वे किसी चीज़ पर अधिकार नहीं रख सकेंगे। यही तो परले दर्जे का भटकाव है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 18 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] काफ़िरों के आमाल की राख जैसी मिसाल

काफ़िर दुनिया में जो भी अच्छे काम (दान-पुण्य, भलाई) करते हैं, ईमान न होने के कारण वे उस राख के ढेर की तरह हैं जिसे तूफ़ानी आंधी पल भर में उड़ाकर तितर-बितर कर देती है। क़यामत के दिन उनके सारे आमाल शून्य और व्यर्थ हो जाएंगे।

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