कुरान - 14:52 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
هَٰذَا بَلَٰغٞ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُواْ بِهِۦ وَلِيَعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ وَلِيَذَّكَّرَ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ

Transliteration: (Haaza balaaghul linnaasi wa liyunzaroo bihee wa liya'lamooo annamaa Huwa Illaahunw Waahidunw wa liyaz zakkara ulul albaab)

यह (क़ुरआन) समस्त मानवजाति के लिए एक खुला संदेश (बलाग़) है, ताकि इसके द्वारा उन्हें सावधान किया जाए, और ताकि वे जान लें कि वही केवल एक पूज्य (सच्चा माबूद) है, और ताकि बुद्धिमान लोग नसीहत स्वीकार करें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 52 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सूरह इब्राहीम का उपसंहार और संदेश

यह मुबारक सूरह इस पैग़ाम पर समाप्त होती है कि क़ुरआन पूरी मानवता के लिए एक ईश्वरीय उद्घोषणा (बलाग़) है। इसका मुख्य मक़सद इंसान को ग़फ़लत से जगाना, तौहीद (ला इलाहा इल्लल्लाह) का ज्ञान देना और विवेकशील लोगों को आत्म-सुधार की प्रेरणा देना है।

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