कुरान - 14:47 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
فَلَا تَحۡسَبَنَّ ٱللَّهَ مُخۡلِفَ وَعۡدِهِۦ رُسُلَهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٞ ذُو ٱنتِقَامٖ

Transliteration: (Falaa tahsabannal laaha mukhlifa wa'dihee Rusulah; innal laaha 'azeezun zuntiqaam)

अतः कदापि यह न समझना कि अल्लाह अपने रसूलों से किए गए अपने वादे के विरुद्ध करेगा; निस्संदेह अल्लाह बड़ा प्रभुत्वशाली (ज़बरदस्त), न्यायपूर्ण प्रतिशोध लेने वाला (ज़ुन-तिक़ाम) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 47 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रसूलों से वादे की सच्चाई और इंतिक़ाम-ए-इलाही

अल्लाह ने रसूलों से मदद और हक़ की जीत का जो वादा किया है वह अटल है। अल्लाह 'अज़ीज़ुन ज़ुन-तिक़ाम' है—अर्थात् इतना शक्तिशाली है कि कोई उसके रास्ते में रुकावट नहीं बन सकता और वह ज़ालिमों से मज़लूमों का पाई-पाई बदला लेने वाला है।

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