कुरान - 14:21 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَبَرَزُواْ لِلَّهِ جَمِيعٗا فَقَالَ ٱلضُّعَفَـٰٓؤُاْ لِلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُوٓاْ إِنَّا كُنَّا لَكُمۡ تَبَعٗا فَهَلۡ أَنتُم مُّغۡنُونَ عَنَّا مِنۡ عَذَابِ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖۚ قَالُواْ لَوۡ هَدَىٰنَا ٱللَّهُ لَهَدَيۡنَٰكُمۡۖ سَوَآءٌ عَلَيۡنَآ أَجَزِعۡنَآ أَمۡ صَبَرۡنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٖ

Transliteration: (Wa barazoo lillaahi jamee'an faqaalad du'afaaa'u lil lazeenas takbarooo innaa kunnaa lakum taba'an fahal antum mughnoona 'annaa min 'azaabil laahi min shai'; qaaloo law hadaanal laahu la hadaynaakum sawaaa'un 'alainaaa ajazi'naa am sabarnaa maa lanaa min mahees)

और वे सब के सब अल्लाह के सामने पेश होंगे, तो कमज़ोर (अनुयायी) उन लोगों से कहेंगे जो बड़े (घमंडी नेता) बने हुए थे, "हम तो तुम्हारे पीछे चलने वाले थे; तो क्या तुम अल्लाह के अज़ाब में से कुछ हिस्सा हम पर से टाल सकते हो?" वे कहेंगे, "यदि अल्लाह ने हमें मार्ग दिखाया होता तो हम भी तुम्हें मार्ग दिखाते। अब तो हमारे लिए बराबर है चाहे हम बेचैनी दिखाएं या सब्र करें, हमारे लिए बचने का कोई मार्ग नहीं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 21 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क़यामत में अंधानुकरण करने वालों और नेताओं का संवाद

क़यामत के दिन आम जनता अपने भ्रष्ट नेताओं और धर्मगुरुओं को पकड़ेगी कि तुम्हारी वजह से हम गुमराह हुए, आज हमें अज़ाब से बचाओ। नेता बेबसी से कहेंगे कि हम ख़ुद अंधे थे, तुम्हें क्या बचाते! आज सब्र करो या चीख़ो-चिल्लाओ, दोज़ख़ से भागने का कोई रास्ता नहीं है।

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