कुरान - 19:79 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
كَلَّاۚ سَنَكۡتُبُ مَا يَقُولُ وَنَمُدُّ لَهُۥ مِنَ ٱلۡعَذَابِ مَدّٗا

Transliteration: (Kallaa; sanaktubu maa yaqoolu wa namuddu lahoo minal 'azaabi maddaa)

हरगिज़ नहीं! वह जो कुछ कहता है हम उसे लिख लेंगे और हम उसके लिए अज़ाब को बढ़ाते ही चले जाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 79

✅ मुजरिम के बोल दर्ज होना और अज़ाब में इज़ाफ़ा

उसकी हर बकवास और कुफ़्रिया कलिमात आमालनामे में दर्ज किए जा रहे हैं, और क़ियामत के दिन उसके इस मज़ाक़ और तकब्बुर के बदले उसके अज़ाब की शिद्दत को और बढ़ा दिया जाएगा।

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